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डॉन पप्पूदेव की पुलिस कस्टडी में मौत

पुलिस ने पांच सहयोगियों और हथियार के साथ पप्पूदेव को किया था गिरफ्तार

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Arun Chourasiaलेखक

SAHARSA-उत्तर बिहार का कुख्यात अपराधी पप्पू देव की पुलिस हिरासत में मौत हो गई।पुलिस मुठभेड़ में भागने के दौरान पुलिस ने पप्पू देव को गिरफ्तार किया था जिसके बाद उसे दिल का दौरा पड़ा था ..उसे वहीं पुलिस अभिरक्षा में इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया था जहां उसकी की मौत हो गई।

पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान पप्पु देव के साथ भाग रहे उसके पाँच सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया है और इन लोगों के पास से एक ऑटोमेटिक राइफ़ल,तीन पिस्टल, तीन देशी कट्टा, 47 राउंड गोली बरामद किया है।

समर्थकों का हंगामा

पप्पू देव की मौत की खबर से इलाके में सनसनी फैल गई है।पप्पू देव की मौत कैसे हुई इस बात की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सही रूप से पता चल पाएगा फिलहाल सहरसा पुलिस ने पप्पू देव की मौत हार्ट अटैक से मौत होने की पुष्टि की है।वहीं पप्पूदेव के समर्थकों ने पुलिस पर मारपीट कर हत्या करने का आरोप लगाया है और इसको लेकर उनके समर्थक सड़क पर उतर कर हंगामा कर रहें हैं.इनलोगों ने ,सहरसा-सुपौल मार्ग के दौरमा चौक पर आगजनी कर किया सड़क जाम कर दिया और पुलिस प्राशासन के खिलाफ नारेबाजी की.

घटना के संबंध में पुलिस की माने तो सदर थाने की पुलिस को गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत सराही में पप्पू देव और उसके कुछ समर्थक जबरदस्ती हरवे हथियार से लैस होकर अपने गुर्गों के साथ एक जमीन की घेराबंदी करवाने का प्रयास कर रहा है जिसके बाद सदर थाने की पुलिस द्वारा छापामारी की गई तो वहां से 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया बाकी लोग स्कॉर्पियो गाड़ी पर सवार होकर भाग निकले जिसके बाद पुलिस बिहरा थाना क्षेत्र अंतर्गत पप्पू देव के घर पहुंची वहां भी छापामारी की गई. वहां से भी दो लोगों को हिरासत में लिया गया.

पुलिस ने हार्ट अटैक से मौत बताया

इस दौरान पप्पू देव के बारे में पूछताछ की गई तो पुलिस को सूचना मिली कि पप्पू देव एक चिमनी भट्ठा के बगल में उमेश ठाकुर के मकान में सोया हुआ है. पुलिस के द्वारा वहां छापामारी की गई तो पप्पू देव और उसके समर्थकों द्वारा पुलिस पर गोलियां चलाई गई. जवाबी कार्रवाई में पुलिस के द्वारा भी आत्म रक्षार्थ फायरिंग की गई. पुलिस से घिरा हुआ देखकर पप्पू देव अपना राइफल लेकर दीवार से छलांग लगाकर भागने की कोशिश करने लगा और दीवार से छलांग लगा दिया जिसके बाद वे गिर गया और पुलिस ने उसे पकड़ लिया हिरासत में लिए जाने के बाद उसने छाती में दर्द होने की शिकायत की तो उसे देर रात इलाज के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन पप्पू देव की स्थिति बिगड़ती चली गई है जिसके बाद उसे बेहत इलाज के रेफर कर दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल या पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजने की तैयारी कर रहे थे,इसी दौरान उसकी मौत हो गई।

कौन है डॉन पप्पू देव..

पप्पू देव 90 के दशक में कोसी के इलाके में एक बड़े डॉन के तौर पर उभरा था. जब बिहार में जुर्म एक उद्योग का रूप ले चुका था, उस दौर में पप्पू देव कोसी के इलाके में ऑपरेट करता था. माना जाता था कि पप्पू देव की मर्जी के बगैर उस इलाके में किसी की किडनैपिंग नहीं की जा सकती. अगर कोई छोटा गिरोह किडनैपिंग की वारदात को अंजाम भी देता था तो अपहृत आखिरकार पप्पू देव के नेटवर्क में ही पहुंचता था.

पप्पू देव बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल में हत्या, लूट, अपहरण, रंगदारी और डकैती जैसे दर्जनों संगीन मामले के नामजद रहा है। 2002 में नेपाल के एक व्यापारी तुलसी अग्रवाल को अगवा कर 5 करोड़ रुपए फिरौती वसूलने के बाद वह विशेष चर्चा में आया था।

पप्पू देव 50 लाख से अधिक के जाली नोट और हेरोइन के साथ नेपाल में गिरफ्तार भी हुआ खा और उसे वहाँ सजा भी हुई थी ..सजा पूरी होने के बाद रिहा होने के बाद फिर से बिहार वापस आ गया था। जनवरी 2014 में यूपी एसटीएफ की मदद से बिहार पुलिस ने नेपाल बॉर्डर से उसे गिरफ्तार किया। बीते साल वह जमानत पर बाहर आया ।था.

नेपाल में पकड़े जाने से पहले पप्पूदेव नवगछिया के मुकंदपुर चौक के पास रात में उसकी पुलिस से भिड़ंत हो गई। पुलिस को देखते ही पप्पू ने ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाते हुए भाग निकला था।

वहीं दूसरी ओर पप्पू देव की राजनीतिक पहंच भी थी. राजद के सासंद रहे स्व. शहाबुद्दीन से अच्छे संबंध थे. उसने अपना पत्नी पूनम देव को 2005 और 2010 का विधानसभा चुनाव लोजपाके टिकट पर बिहपुर विधानसभा से लड़ाया था।पूनम ने 2015 में बतौर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में महिषी विधानसभा से भी चुनाव लड़ा था पर उसे उसे किसी भी विधानसभा चुनाव में सफलता नहीं मिल पाई थी.

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