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बिहार में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर : 5,285 खेल मैदान बनकर तैयार,अंतिम चरण में 32 मैदान

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पटना: बिहार सरकार राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और ग्रामीण युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य की सभी 8,050 ग्राम पंचायतों में खेल मैदान विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि अब तक 5,317 पंचायतों में खेल मैदान निर्माण की स्वीकृति दी जा चुकी है। इनमें से 5,285 खेल मैदान पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि 32 मैदानों का निर्माण अंतिम चरण में है।

जिलावार प्रगति की बात करें तो पूर्वी चंपारण 307 खेल मैदानों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद मुजफ्फरपुर में 263, मधुबनी में 257, गया में 218, समस्तीपुर में 194, पश्चिम चंपारण में 176, पूर्णिया में 173, नवादा में 169, सारण में 168, रोहतास में 166, बांका में 162, दरभंगा में 156, सीवान में 155, भोजपुर में 154, कटिहार में 151, नालंदा में 150 और पटना में 126 खेल मैदान बनकर तैयार हो चुके हैं।

सरकार का कहना है कि पंचायत स्तर पर खेल मैदान बनने से गांवों के बच्चों और युवाओं को नियमित अभ्यास के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। इससे खेल प्रतिभाओं को स्थानीय स्तर पर ही आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और वे राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

राज्य सरकार का मानना है कि मजबूत खेल अवसंरचना ही भविष्य के खिलाड़ियों की सबसे बड़ी ताकत है। राजगीर में विश्वस्तरीय खेल परिसर, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम और पंचायत स्तर पर खेल मैदानों के निर्माण जैसी परियोजनाएं बिहार में खेलों के विकास को नई दिशा दे रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक से अधिक प्रतिभाएं निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार का नाम रोशन करें।