भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी की जयंती आज
जिनके आशीर्वाद से पहली बार मुख्यमंत्री बने थे नीतीश कुमार..
अटल जी के साथ नीतीश ने मिलकर बिहार को दिया बड़ा तोहफा.
PATNA:-भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी की 98 वी जयंती आज पूरा देश मना रहा है.2024 में केन्द्र की सत्ता से बेदखल करने का संकल्प लेने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आज अटल जी की जयंती मना रहे हैं जिसे बीजेपी अपना आदर्श मानती है. उस बीजेपी का जो अभी नीतीश फूटी आंखो से नही सुहा रहे है. आखिर क्या वजह है कि एक तरफ नीतीश बीजेपी के विरोध में पूरे देश में विपक्षी नेताओं से मिल रहे है तो दूसरी तरफ नीतीश अटल जी को अपना गुरू मानते हुए कहते हैं कि अगर वे नही होते तो गवर्नेस के आधारभूत चीजों को नही समझते.
वजह साफ है. बिहार के जिन राजनेताओं ने अटल जी के साथ काम किया है उसमें नीतीश प्रमुख रहें है. यही वजह है कि नीतीश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर सीधा हमला करते हुए अटल जी का गठबंधन धर्म याद करते हुए कहते हैं कि किस तरह से अटल जी ने रामजन्म भूमि , समान अचार संहिता और धारा 370 को ठंढे बस्ते में डाल दिया था.
बीजेपी और नीतीश की समता पार्टी के बीच पहली बार 1996 को लोकसभा चुनाव में पहली बार समझौता हुआ और दोनों दलों ने दो अंको में लोकसभा की सीट जीती . 1994 में जार्च फर्णांडिज के साथ मिलकर समता पार्टी बनाने वाले नीतीश जब 1995 मे बिहार विधान सभा का चुनाव लड़ा तो 324 विधान सभी की हैसियत बाली विधान सभा में केवल आधा दर्जन सीट जीत पाये.
1999 के लोकसभा चुनाव में जब नीतीश कुमार कुमार की स्थिति कमजोर होने की सूचना मिली को अटल जी व्यक्तिगत रूप नीतीश को फोन करके स्थिति की जानकारी ली.शायद यही वजह रही की अटल बिहारी बाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में नीतीश ने बिहार को एम्स , कोशी महासेतु , मुंगेर में गंगा नदी पर पुल हरनौत रेलकारखाना समेत अनेक परियोजनायें दी जो बिहार के विकास में मील का पत्थर साबित हुआ.
लेकिन इन सबसे अलग नीतीश को पहली बार बिहार का मुख्यमंत्री बनाने में भी अटल जी की महत्वपूर्ण भूमिका थी और सन 2000 में पहली बार 7 दिनो के लिये नीतीश बिहार के मुख्यमंत्री बने थे.चारा घोटले में लालू के फंसने के बाद लालू के जनाधार में गिरावट आयी थी उस समय बिहार से झारखंड अलग नही हुआ था और विधान सभा की हैसियत 324 सीटों की थी . जिसमें राजद को 124 सीटें आयी थी . जबकि कांग्रेस 23 सीट पर विजयी हुई थी . वैसी परिस्थिति में केन्द्र की अटल बिहारी सरकार ने नीतीश को मदद किया था. और बीजेपी के 67 विधायकों ने समता पार्टी की 34 हैसियत वाले नीतीश को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलायी . हालांकि 3 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश की सरकार ने 9 मार्च को विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव भी किया लेकिन बहुमत नही मिलने के कारण उन्होनें 10 मार्च को इस्तीफा भी दे दिया. हालांकि उस समय तात्कालीन राज्यपाल विनोद चंद्र पांडे के खिलाफ आर जे डी ने मोर्चा भी खोला था और काग्रेस और 20 निर्दलीय विधायकों के समर्थन से फिर राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनी और कांग्रेस के सदानंद सिंह विधान सभा के अध्यक्ष.
लेकिन इसके बावजूद अटल जी ने नीतीश को निराश नही होने दिया और पूरी तरह से बिहार में रहकर राजनीति करने का एलान करने वाले नीतीश को केन्द्र में बुलाकर कृषि मंत्री की जिम्मेवारी दी . इतना ही नही इसके पहले भी 1999 में जब गैसेल रेल दुर्घटना हुई थी जिसमें 300 यात्रियों की मौत हुई थी उस समय भी केन्द्रीय रेलमंत्री पद से जब नीतीश ने इस्तीफा दिया था तो अटल बिहारी बाजपेयी इस्तीफा स्वीकार नही कर रहे थे लेकिन काफी जद्दोजहद के बाद उन्होनें इस्तीफा स्वीकार किया.
बिहार की राजधानी पटना में एम्स का निर्माण अटल जी की ही देन है . 350 करोड़ की लागत से 2004 से शुरू हुए एम्स का निर्माण कार्य 2012 में पूरा हुआ और अटल जी की जयंती 25 दिसंबर 2012 को इसका उद्घाटन हुआ.
बीजेपी के सहयोग से बिहार में पांच बार 2000, 2005 , 2010 , 2017 और 2020 में बिहार के मुख्यमंत्री बनने वाले नीतीश के राजनीतिक जीवन में स्व अटल बिहारी बाजपेयी का महत्वपूर्ण योगदान है. शायद यही वजह है कि बीजेपी के राजनीतिक विरोधी नीतीश अभी भी अटल जी को नही भूलते.
अशोक मिश्रा. संपादक कशिश न्यूज .
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