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कोरोना का असर कम होने पर पर्यटन उद्योग को बढावा देने पर फोकस

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Adminलेखक

केन्द्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डा ने पर्यटन उद्योग को लोक कल्याण और समृद्धि का इंजन बताया

PATNA: भारत आज की तारीख में कोविड वैक्सीन की 75 करोड़ डोज लगाने का कार्य पूरा करने वाला है।इससे पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों में रोजगार के प्रति थोड़ी से उम्मीद जगी है।इसको लेकर देश के पर्यटन मंत्री जे किशन रेड्डी भी उत्साहित हैं।

सिकंदराबाद के लोकसभा सांसद सह पर्यटन, संस्कृति और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री जी किशन रेड्डी ने बताया कि इस उद्योग के लिए इससे बड़ी आत्मविश्वास बढ़ाने वाली कोई दूसरी बात नहीं हो सकती कि कोरोना का असर कम होने के बाद भारत के अधिकांश राज्यों में जिंदगी सामान्य हो रही है।हलांकि कोरोना काल में अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन को पूरी तरह खुलने में अधिक समय लग सकता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा पर अभी भी कई तरह की पाबंदियाँ हैं। लेकिन हमारे पास घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने का एक शानदार अवसर है, क्योंकि साल के अंत तक हमारी आबादी के एक बड़े हिस्से का पूरी तरह से टीकाकरण हो चुका होगा।

पूर्वोत्तर के पर्यटन मंत्रियों का सम्मेलन कल से गुवाहाटी में

कोरोना के असर कम होने के बाद केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा पूर्वोत्तर राज्यों के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन कल 13 सितंबर से गुवाहाटी में आयोजित की जा रही है।इस यह सम्मेलन का एक विशेष महत्व है।यह दो दिवसीय सम्मेलन, पर्यटन के विकास और पूर्वोत्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के सभी हितधारकों के बीच तालमेल बनाने पर केंद्रित है। सम्मेलन में पूर्वोत्तर क्षेत्र में क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और मानव संसाधन विकास परियोजनाओं, साहसिक खेलों के लिए प्रबंधन, संचालन और सुरक्षा मानकों तथा डिजिटल प्रचार और विपणन जैसे विषयों पर विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जायेगा।

पूर्वोत्तर के राज्यों पर मोदी सरकार का फोकस

पर्यटन, संस्कृति और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री जी किशन रेड्डी की मानें तो पर्यटन पूर्वोत्तर क्षेत्र के अष्ट लक्ष्मी राज्यों का प्रधानमंत्री के ह्रदय में विशेष स्थान है और उन्होंने त्रिस्तरीय रणनीति के तहत इस क्षेत्र के विकास के लिए अथक प्रयास किये हैं। सबसे पहले, उनके नेतृत्व में विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके परिणाम स्वरूप विद्रोही समूह, हिंसा त्यागने और देश के विकास एजेंडे से खुद को जोड़ने के लिए प्रेरित हुए हैं। इससे अवसंरचना परियोजनाओं की प्रगति में तेजी आई है और प्रधानमंत्री की निरंतर निगरानी और समय पर हस्तक्षेप से परियोजना निष्पादन के समक्ष आने वाली बाधाओं को हल करने में सहायता मिली है और अंत में शांति के वर्तमान माहौल और आधुनिक अवसंरचना से पर्यटकों और कारोबार में रुचि रखने वालों के लिए इस क्षेत्र की यात्रा आसान हुई है।

पूर्वोत्तर में पर्यटन के क्षेत्र में काफी संभावनायें

2019 में लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस समारोह के संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा था प्रत्येक भारतीय नागरिक को आजादी के 75 बर्ष पूरा करने के बाद 2022 से कम से कम 15 गंतव्यों की यात्रा करने का लक्ष्य रखना चाहिए।पश्चिम में बांग्लादेश, पूर्व में म्यांमार तथा उत्तर में भूटान और चीन के साथ, पूर्वोत्तर राज्य वास्तव में भारत के मुकुट में अनमोल रत्न के समान हैं और प्रत्येक घरेलू यात्री को अपने यात्रा कार्यक्रम में इन्हें शामिल करने की जरूरत है। बर्फ से ढकी चोटियों, पानी के तेज प्रवाह के साथ बहने वाली नदियों, बड़ी घाटियों और मनोहारी प्राकृतिक परिदृश्यों के साथ पूर्वोत्तर राज्यों में असीम संभावनाओं से भरे अनगिनत पर्यटन स्थल हैं। इन राज्यों में अपार जातीय, सांस्कृतिक और भाषाई विविधताएं भी मौजूद है।

पर्यटन से रोजगार की असीम संभावनायें

पर्यटन में राज्य, उसकी संस्कृति और उसके लोगों पर एक महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव पैदा करने की क्षमता होती है। विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि 10 लाख रुपये के निवेश पर पर्यटन क्षेत्र 78 नौकरियों का सृजन कर सकता है और इस आधार पर यह हमारे प्राथमिक, द्वितीयक या तृतीयक क्षेत्रों की रोजगार सृजन क्षमता की तुलना में सबसे अधिक है। 2019-20 में कुल रोजगार में पर्यटन क्षेत्र की नौकरियों का हिस्सा 15.34 प्रतिशत था, जिससे अर्थव्यवस्था में 79.86 मिलियन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए थे। हम पूर्वोत्तर क्षेत्र में रोजगार सृजन का इंजन बनने के लिए पर्यटन क्षेत्र की क्षमता का उपयोग करने के लिए प्रयासरत हैं। इसे ऐसे तरीके से किया जाना चाहिए, जो स्थायी हो; ताकि पूर्वोत्तर क्षेत्र की मूल परम्पराओं व लोकाचार को संरक्षित रखा जा सके। पारिस्थिति की, ग्रामीण और साहसिक पर्यटन में अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में प्राकृतिक विरासत का एक बड़ा भंडार विद्यमान है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में चाय पर्यटन, आरोग्य पर्यटन और फिल्म पर्यटन जैसे कई पूर्व-निर्धारित व शानदार पर्यटन अनुभवों की भी संभावनाएं हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस क्षेत्र में बांस की 100 से अधिक प्रजातियां हैं, जो इस क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध हैं। यहाँ अगरबत्ती, बांस की चटाई, कतरन और पट्टी जैसे उत्पादों का निर्माण किया जाता है और स्थानीय समुदायों की आर्थिक समृद्धि के लिए इन्हें बढ़ावा दिया जाना चाहिए। चाहे वह असम का मूगा रेशम हो या नागालैंड की नागा मिर्च, इस क्षेत्र में देश और दुनिया के बाकी हिस्सों को देने के लिए बहुत कुछ मौजूद हैं।

आजादी का अमृत महोत्सव के तहत, हम भारत तथा विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों के त्योहारों, जो देश के विभिन्न स्थानों के लिए विशिष्ट हैं, को आगे लाने की दिशा में काम करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ये त्योहार वास्तव में उस भावना का उत्सव मनाते हैं, जो हमें एक सभ्यता के रूप में परिभाषित करती है और “एक भारत, श्रेष्ठ भारत”का अनुभव प्रदान करती है।

अरूण चौरसिया कशिश न्यूज

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