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सी पी आई नेता और जे एन यू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार क्या बदलेगे पाला , राहुल गांधी से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारो में कांग्रेस में

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Adminलेखक

जे एन यू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और सी पी आई नेता कन्हैया कुमार अब सी पी आई को बाय - बाय कह कांग्रेस का दामन थाम सकते है. इसकी चर्चा अब राजधानी दिल्ली के राजनीतिक गलियारो मे तेज हो गयी है. मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी से कन्हैया कुमार की दो बार मुलाकात भी करवायी है. इस बात को बल तब मिला जब कन्हैया ने सी पी आई मुख्यालय स्थित अपने कार्यालय को भी खाली कर दिया.

जानकार सूत्रो के मुताबिक बिहार में अपनी खोयी जमीन वापस करने के लिये कांग्रेस कन्हैया को पार्टी में शामिल करा युवाओं के बीच एक नया चेहरा लाना चाहती है. दूसरी तरफ अपनी पार्टी में हुई फजीहत से परेशान कन्हैया अब सी पी आई को बाय - बाय करने के मूड में है.
असल में कन्हैया का अपनी पार्टी के साथ विवाद तब हुआ जब सी पी आई के प्रदेश कार्यालय जनशक्ति भवन में उनके समर्थको द्वारा पार्टी के कार्यालय सचिव के साथ दुर्व्यवहार किया था. जिसे पार्टी ने गंभीरता पूर्वक लेते हुए हैदराबाद की मीटींग में कन्हैया के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पारित किया था. हालांकि सी पी आई के नेता कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलो को सिरे से खारिज करते है और उनका दावा है कि इसी सिंतबंर माह में सी पी आई की दिल्ली में हुई बैठक में कन्हैया कुमार शामिल थे. जबकि उनके समर्थक अभी भी पार्टी मुख्यालय में रह रहे है.
2015 में जे एन यू कैंपस में राष्ट्रविरोधी नारे के चलते सुर्खियो में आये कन्हैया कुमार युवाओ के बीच वी जेपी विरोधी चेहरा माने जाते है. यही वजह है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सी पी आई ने उन्हे बेगूसराय से लोकसभा का उम्मीदवार भी बनाया था. लेकिन गिरीराज सिह से 4 लाख से ज्यादा वोटो से हारे कन्हैया कुमार का अब अपनी पार्टी से भी मोहभंग हो रहा है. इस बीच इसी साल कन्हैया की मुलाकात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी से भी हुई और अटकले लगायी जा रही थी कि कन्हैया जद यू मे शामिल हो सकते है. इसकी वजह भी थी कि जेल से निकलने के बाद बिहार दौरे पर आये कन्हैया निर्वाध रूप से अपनी यात्रा करने में सफल रहे. लेकिन जद यू का बीजेपी के साथ गठबंधन होने के कारण जद यू बीजेपी की नाराजगी मोल नही लेना चाहती और इसलिये कन्हैया की इंट्री नही हो पायी.

जानकार सूत्रो के मुताबिक कांग्रेस ने कन्हैया को पार्टी में शामिल कराने की जिम्मेवारी एन एस यू आई के पूर्व अध्यक्ष और जौनपुर सदर के पूर्व विधायक मो0 नदीम जावेद को दी है.कांग्रेस नेताओं की माने तो 2005 से ही बिहार मे कांग्रेस की राजनीति हाशिये पर है 2010 में तो विधान सभा में विधायको की संख्या 4 पर आ गयी थी. लेकिन 2015 में जद यू राजद के साथ आने पर इसे 27 सीटे और 2020 में राजद, वामपंथी दलो के साथ आने से इसकी संख्या 19 पर अटकी है. ऐसे में कांग्रेस कन्हैया को सामने लाकर अपने खिसके वोट बैक को एक बार फिर से वापस लाना चाहती है. दर असल में कन्हैया जिस जाति भूमिहार से आते है वह लडा़कू माने जाने वाली जाति है जो अब तक बीजेपी के साथ है. ऐसे में कांग्रेस सवर्ण मतदाताओं को एक बार फिर एक जुट करने के लिये प्रशांत किशोर और कन्हैया दोनो को जोड़ना चाहती है. फिलहाल सी पी आई और कांग्रेस के बीच खड़े कन्हैया कब पाला बदलते है देखना बाकी है.
अशोक मिश्रा, कशिश न्यूज.

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