नम आखों से नेताओं ने दी सदानंद सिंह को अंतिम विदाई
नीतीश ने कहा कि हमारे साथ था उनका मित्रवत संबंध तो तेजस्वी का बयान वे थे हमारे अभिभावक
नीतीश का एलान पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ होगा उनका अंतिम संस्कार
बिहार विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस के दिग्गज नेता सदानंद सिंह के निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर है.बुधवार को सुबह हुई सदानंद सिंह के निधन के बाद जब उनका पार्थिव शरीर विधान सभा परिसर में लाया गया तो नेताओं ने दलीय सीमा तोडकर उन्हें अंतिम विदाई थी.
इस अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार , उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद , विधान सभा अध्यक्ष विजय कुमार सिंहा,विधान सभा में विरोधी दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव , पूर्व विधान सभा अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी समेत राज्य सरकार के कई मंत्री विधायक और विधान परिषद के सदस्यो ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया.
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पत्रकारो से बातचीत करते हुए कहा कि उनके निधन से हमलोग बहुत दुखी है. वे लोकप्रिय नेता रहे और सबो से मित्रवत व्यवहार था .हमलोगो का उनसे पहले संबंध था.जब से वे बीमार पड़े थे उनके पुत्र से बातचीत हुई थी .वे दिल्ली से लौटकर आये तो उनका यहां इलाज चल रहा था. नीतीश ने विधान सभा परिसर में भी सदानंद सिह के पुत्र शुभानंद से बात कर उन्हें सांत्वना दी.
वही राज्य के उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद विधान सभा अध्यक्ष विजय कुमार सिंहा ने भी स्व सिंह को लोकप्रिय नेता बतलाते हुए उनके निधन पर गहरा शोक जताया है. बिहार विधान सभा में विरोधी दल के नेता तेजस्वी यादव ने स्व सिंह को अपना अभिभावक बतलाया और कहा कि हमारा उनके साथ पारिवारिक सबंध था. तेजस्वी ने पुरानी बातो को याद करते हुए कहा कि जब वे उप मुख्यमंत्री बने थे तो विधान सभा मे पहला सवाल सदानंद सिंह ने ही पूछा था.पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने भी शोक जताया है और कहा है कि उनकी कमी हमेशा खलेगी.
विधान सभा परिसर के बाद कांग्रेस प्रदेश मुख्यलय सदाकत आश्रम में भी सदानंद सिंह के पार्थिव शरीर को ले जाया गया जहां प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष मदन मोहन झा , पूर्व मंत्री और कांग्रेस के महासचिव शकील अहमद कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी , पूर्व विधान सभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी , कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया प्रभारी प्रमचंद मिश्रा , हरखू झा समेत अनके नेताओ ने श्रद्धांजलि दी. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदनमोहन झा ने तो उन्हें अपना अभिभावक बतलााया और कहा कि उनका मुस्कुराता चेहरा हर समय याद रहेगा.
भागलपुर जिले के कहलगांव से 1969 से राजनीति की शुरूआत करने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता सदानंद सिंह 9 बार विधायक रहे . वे बिहार सरकार में सिंचाई और उर्जा विभाग के मंत्री के अलावे 2000 से 2005 तक विधान सभा के अध्यक्ष रहे तो 10 साल विधान सभा में विधान सभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता अलावे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे. 1977 में जनता पार्टी की लहर में भी वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधान सभा में पहुंचने वाले विधायक थे.
कांग्रेस में डा0 जगन्नाथ मिश्रा के कट्टर समर्थक मान ेजाने वाले सदानंद सिंह अंत तक कांग्रेस में ही रहे इस वजह से उन्हें 1985 के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट से बेदखल कर दिया गया लेकिन फिर भी वह निर्दलीय चुनाव जीतकर विधान सभा पहुंचे.12 बार विधान सभा और एक बार लोकसभा का चुनाव लड़ने वाले 76 वर्षीय सदानंद सिंह 9 बार विधान सभा का चुनाव जीत कर करीब पांच दशक से बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभायी.
स्व जगन्नाथ मिश्रा के कांग्रेस छोड़ने के बाद भी वे कांग्रेस के वफादार कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहे.2020 में चुनावी राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा के चलते उनके बेटे शुभानंद को कहलगांव से टिकट दिया गया लेकिन वह चुनाव जीत नही पाये.
लीवर सिरोसिस जेसी गंभीर बीमारी से ग्रसिंत श्री सिंह का निधन 8 सिंतंबर को सुबह हो गया है. प्रदेश कांग्रेस के अग्रीम पंक्ति के माने जाने वाले नेताओ ंमें सदानंद की भूमिका महत्वपूर्ण तो थी ही सभी दलो में भी वे सदानंद बाबू के नाम से लोकप्रिय थे.
अशोक मिश्रा , कशिश न्यूज.
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