झारखंड हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी-..JPSC संवैधानिक संस्थान नहीं होती तो उसे आज ही बंद करने का आदेश दे देते
रांची- धनबाद के जज उत्तम आनंद की संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई मौते के मामले की सुनवाई करते हे झारखंड हाईकोर्ट ने आज बेहद तल्ख टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने मौखिक रुप से बेहद नाराजगी भरे लहजे में कहा कि अगर JPSC अगर संवैधानिक संस्था नहीं होती तो उसे आज ही बंद करने का आदेस दे देते।
गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में जज उत्तम आनंद की मौत की जांच के मामले पर चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और सुजीत नारायण प्रसाद की कोर्ट में हुई सुनवाई हुई। राज्य सरकार की ओर से पीयूष चित्रेश और jpsc की ओर से संजय पिपरवाल ने पक्ष रखा। कोर्ट ने FSL में पदों की स्वीकृति और नियुक्ति की जानकारी ली। राज्य सरकार के ओर से अधिवक्ता पीयूष चित्रेश और JPSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने कोर्ट को बताया कि FSL में पद सृजित है और उन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरु की जा रही है। इसपर कोर्ट ने कहा कि 2011 में लैबोरेट्री असिस्टेंट वैज्ञानिक के पद की स्वीकृति मिली लेकिन उसपर अभी तक नियुक्ति नही हो पाई...इससे बड़ा राज्य के लिए शर्म की क्या बात हो सकती है। इससे पहले की सुनवाई में सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि जांच अभी चल रही है। जिसपर कोर्ट ने कहा था कि जो भी जांच रिपोर्ट आए, वह प्लेन से मंगाई जाए न कि ट्रेन से। क्योंकि उसमें छेडछाढ संभव है। सरकार की ओर से जो शपथ पत्र दाखिल किया गया था, उसपर भी कोर्ट ने असंतुष्टि दिखाई। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
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