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नीतीश को पी एम मेटेरियल बता, जातीय जनगणना और कोर्डिनेशन कमिटी की मांग कर जद यू ने बीजेपी को डाला बैक फूट पर

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Adminलेखक

जद यू के इस स्टैंड पर बीजेपी नेता मौन , तो बीजेपी विरोधियो की खिली बांछे
ललन सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर ताजपोशीके बहाने जद यू के राष्ट्रीय परिषद की बैठक ने असल में अपनी पार्टी के एक मात्रनेता नीतीश कुमार की पी एम मैटेरियल के रूप में ताजपोशी कर दी. दर असल जद यू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक के ठीक पहले जद यू के प्रदेश कार्यालय में पार्टी के सर्वोपरी नेता नीतीश कुमार की तस्वीर के साथ जब बड़े - बड़े होर्डिग्सलगवायेगये तो जद यू कार्यकर्ता क्या सूबे के राजनीतिक पंड़ितो ने भी यही सोचा कि पार्टी में चेहरे को लेकर छिड़े विवाद पर विराम लगाने के लिये नीतीश की तस्वीर लगायी है . लेकिन जब राष्ट्रीय परिषद का प्रस्ताव सामने आया तो यह स्पष्ट हो गया कि यह सब एक रणनीति के तहत की गयी थी यानिनीतीश केवल पार्टी के सर्वमान्य नेता ही नहीपी एम मैटेरियल भी है.
रविवार को आयोजित जद यू के राष्ट्रीय परिषद की बैठक पर नजर रखने वाले राजनीति के पंडित इस इस इंतजार में थे कि इस बैठक में आखिर ललन सिहऔर आर सी पी नीतीश के समक्ष क्या बोलते है. हालांकि मीटींगमें कुछ ऐसा नजारा दिखा भी .जब आर सी पी ने जद यू को राष्ट्रीय पार्टी बनाने के लिये यू पी और मणिपुर समेत अन्य राज्योमें चुनाव लड़ने की सलाह दी तो ललन सिंह ने अपने संबोधन में पलटवार भी किया . ललन सिह ने कहा कि आर सी पी बाबू का बीजेपी के नेताओं के साथ बेहतर सबंधहै ऐसे में वे यू पी और मणिपुर में जद यू को सीट दिलवादे. वही जब जातीय आरक्षण को लेकर पार्टी के प्रधान महासचिव के सी त्यागी ने सड़क पर भी उतरने की सलाह दी तो आर सी पी ने अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने को सही नहीकरार दिया.लेकिन इन सब पर नीतीश का पी एम मैटेरियल का प्रस्ताव सभी पर भारी पड़ा और बैठक की पूरी सुर्खियामीडिया में नीतीश बटोर ले गये.
राजनीतिक हलको में अब सवाल पूछा जाने लगा है कि आखिर ऐसी क्या नौबत पड़ी कि जद यू को नीतीश के लिये यह प्रस्ताव पारित करवाना पड़ा. राजनीति के जानकार मानते है कि जातीय जनगणना और जनसंख्या नियंत्रण एक ऐसा भूत है जिसके सहारे एक बार फिर आरक्षण की हवा राजनीतिक दलोद्वारा बहायीजा रही है. स्वाभाविक है इन दो मुद्दोके बहाने बीजेपी विरोधी पार्टियागोल बंद हो रही है वही उन्हे लग रहा है कि इस मुद्दे पर पिछड़ो , अतिपिछड़ोऔर अल्पसंख्यको का समर्थन उन्हेमिलेगा और उनके वोट बैक में बढ़ोतरी होगी. ठीक नीतीश भी उसी विचारधारा से आते है और उनका वोट बैंक भी वही है. ऐसे में जातीय जनगणना और जनसंख्या नियंत्रण पर जद यू ने अपना स्टेंडक्लियर करके यह संकेत दे दिया है कि वह अपने वोट बैंक के लिये किसी से भी समझौता कर सकता है और सड़क पर उतर सकता है.
दूसरी तरफ जद यू के नेता यह मानते है कि अगर जातीय जनगणना और जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर जद यू का रिश्ता बीजेपी से टूटता है तो बीजेपी के खिलाफ बनने वाले मोर्चे में जद यू को नीतीश के चेहरे का लाभ मिलेगा और वैसी परिस्थिति में नीतीश विपक्ष के पी एम उम्मीदवार हो तो कोई आश्चर्य नही शायदइसी संभावना को देखते हुए नीतीश ने अपने सभी राजनीतिक विरोधियो को जातीय जनगणना के मुद्दे पर गोलबंद कर पी एम से मुलाकात भी की थी.
जद यू के राष्ट्रीय परिषद के प्रस्ताव से बिहार बीजेपी के नेता भौचक है. वह समझ नहीपा रहे कि आखिर वे अपनी सहयोगी पार्टी के फैसले का स्वागत करे या विरोध. नीतीश को पी एम मैटेरियल माने या नही . चूंकि जद यू ने नीतीश को पी एम मैटेरियल माना तो है लेकिन कहा है कि वे इसके दावेदार नही है और अभी पी एम नरेन्द्र दामोदर दास मोदी है.इसके अलावे जद यू ने अटल बिहारी बाजपेयीकी सरकार के जमाने की तरह फिर से केन्द्र और राज्य में एन डी ए की कोर्डिनेशन कमिटीबनाने की मांग कर बीजेपी को बैक फूट पर डाल दिया है.जातीय जनगणना और जनसंख्या नियंत्रण पर बीजेपी और जद यू के बीच चल रहे शह मात के खेल से बीजेपी विरोधी पार्टियागद गद है और उन्हें लग रहा है कि देर सबेर नीतीश उसके पाले में आयेगें. भले ही नीतीश अभी नरेन्द्र मोदी को पी एम मान रहे हो.लेकिन जो भी हो जातीय जनगणना और जनसंख्या नियंत्रण कानून के मुद्दे को हाइजेक कर नीतीश ने बीजेपी पर सधा हुआ तीर चलाया है जो सही निशाने पर बैठा है. इन दोनो मुद्दो पर बीजेपी भी समझौते के मूड में नही दिख रही है. ऐसे में देखना है कि बीजेपी नेतृत्व का अगला कदम क्या होताहै . फिलहाल सूबे में बीजेपी के कंधे पर सबारहोकर नीतीश मुस्कुरा रहै है और नीतीश के भार से दबी बीजेपी कराह भी नही पा रही है.

अशोक मिश्रा , कशिश न्यूज पटना.

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