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पार्टियों में चला जनता दरबार का ट्रेंड....जनता के दर्द पर कितना कारगर ??

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Adminलेखक

पटना। बिहार में इस समय जनता के साथ सीधे कनेक्ट होने के लिए जनता दरबार लगाने का दौर शुरु हो गया है। तकरीबन पांच वर्षों के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनता दरबार लगाना शुरु किया ताकि जनता की समस्याओं से सीधे कनेक्ट हो सकें। उसी बीच बीजेपी ने भी हर सोमवार से अपने कोटे के मंत्रियों को सहयोग कार्यक्रम के जरिए जनता दरबार शुरु किया। अब जेडीयू ने भी पार्टी कार्यालय में हर तीन मंत्रियों को बिठाना शुरु कर दिया है। वही जीतनराम मांझी की पार्टी ने भी जनता दरबार की मुहिम में शामिल हो गयी है। हम की ओर से मंत्री संतोष सुमन भी हर मंगलवार को अपने आवास पर जनता दरबार लगाएंगे।

सीएम का जनता दरबार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब पहली बार सत्ता में आए थे, तो उन्होंने जनता की समस्याओं से सीधे तौर पर जानने के लिए जनता दरबार शुरु किया। इसका नाम दिया गया, जनता के दरबार में मुख्यमंत्री.. यह जनता दरबार लंबे समय तक चला। लेकिन 2016 में यह कार्यक्रम बंद कर दिया गया। लेकिन शायद नीतीश कुमार को यह आभास हुआ होगा कि जनता से जुडे रहने और उनकी समस्याओं को सीधे तौर पर जानने के लिए जनता दरबार सबसे अधिक कारगर कार्यक्रम है। इसीलिए पांच साल के बाद नीतीश कुमार ने यह फिर शुरु किया। जो पहले की तरह हर सोमवार को लग रहा है।

बीजेपी का जनता दरबार

बिहार प्रदेश बीजेपी भी इस समय सहयोग कार्यक्रम के जरिए अपने पार्टी दफ्तर में जनता दरबार लगा रही है। बीजेपी ने पहले भी सहयोग कार्यक्रम के माध्यम से जनता की समस्याओं का सीधा निबटारा करने का दावा करती रही है। इस समय बीजेपी के मंत्री सोमवार से शनिवार तक बैठ रहे हैं और जनता की समस्या सुन रहे हैं।

जेडीयू का जनता दरबार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता दरबार लगाते रहे हैं। लेकिन जेडीयू ने कभी भी अपने पार्टी ऑफिस में जनता दरबार नहीं लगाया। इस इस मंगलवार से जेडीयू ने भी जनता दरबार शुरु किया है। मंगलवार से शुक्रवार तक चलने वाले इस दरबार में हर दिन तीन मंत्री पार्टी ऑफिस में बैठेंगे और जनता की समस्या सुनेगे और उसका निदान करेंगे।

हम का जनता दरबार

जनता दरबार के इस दौड में अब जीतनराम मांझी की पार्टी हम भी शामिल हो गयी है। हम की ओर से जीतनराम मांझी के बेटे संतोष सुमन नीतीश सरकार में मंत्री है। इस नाते अब वे भी हर मंगलवार को अपने आवास पर जनता दरबार लगाकर जनता के दुख दर्द बांटेंगे।

लेकिन सवाल यह है कि इतने दरबार का असर कितना होगा। मुख्यमंत्री जब खुद जनता दरबार लगाते हैं तो समस्याओं का तुरंत समाधान करने के लिए पूरा महकमा खडा रहता है। पटना क्या राज्य का हर अधिकारी अलर्ट मोड पर रहता है कि कब सीएम का फोन आ जाए। लेकिन बीजेपी और जेडीयू और अब हम की ओर से जो जनता दरबार लग रहा है या लगेगा, वह जनता के दर्द पर किस हद तक मरहम लगा पाता है।

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