झारखंड सरकार की बड़ी पहल : इनक्यूबेटर प्रोग्राम लॉन्च,150 महिला उद्यमों को मिलेगा IIM कलकत्ता का तीन वर्षों तक सहयोग
रांची: झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने गुरुवार को प्रोजेक्ट भवन में राज्य स्तरीय झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम की आधिकारिक वेबसाइट और ठाकुर गंगटी मांडरो सखी सिल्क हैंडलूम वीवर्स की वेबसाइट का भी लोकार्पण किया। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिला उद्यमियों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाना है।
महिला उद्यमिता को मिलेगा नया प्लेटफॉर्म
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि अब तक झारखंड की पहचान मुख्य रूप से खनिज संपदा के लिए रही है, लेकिन अब राज्य की महिलाएं अपनी मेहनत और कौशल के दम पर उद्यमिता के क्षेत्र में नई पहचान बना रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

150 उद्यमों से शुरुआत,आगे होगा विस्तार
मंत्री ने बताया कि फिलहाल कार्यक्रम के पहले चरण में 150 महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों का चयन किया गया है, जिन्हें तीन वर्षों तक IIM कलकत्ता इनोवेशन पार्क का तकनीकी सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस पहल का विस्तार कर JSLPS से जुड़े 1.54 लाख से अधिक उद्यमों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण, तकनीक, बाजार और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
झारखंड को नवाचार और महिला उद्यमिता की नई पहचान
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड अब केवल खनिज संपदा के लिए नहीं, बल्कि नवाचार, महिला उद्यमिता और सफल ग्रामीण उद्यमों के लिए भी देशभर में अपनी अलग पहचान बनाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में 10 हजार से अधिक ग्रामीण उद्यम बेहतर कार्य कर रहे हैं और पलाश व आजीविका जैसे ब्रांड राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं।
क्या है झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और IIM कलकत्ता इनोवेशन पार्क के सहयोग से संचालित यह तीन वर्षीय कार्यक्रम महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म एवं नैनो उद्यमों को प्रशिक्षण, मेंटरिंग, प्रमाणन, ब्रांडिंग, वित्तीय सहायता, ई-कॉमर्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म और बाजार से जोड़ने का काम करेगा। इसके तहत रांची में एक केंद्रीय हब और संभागीय स्तर पर पांच क्षेत्रीय स्पोक स्थापित किए जाएंगे।
सखी सिल्क को मिला डिजिटल मंच
मंत्री ने सखी सिल्क वेब पोर्टल के शुभारंभ पर कहा कि इससे ठाकुरगंगटी के भगैया सिल्क बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को मजबूत बाजार मिलेगा। उनके उत्पादों की ब्रांडिंग सखी सिल्क के तहत की जाएगी और उन्हें पलाश व अदिवा स्टोर्स के माध्यम से भी बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।
भगैया सिल्क को मिलेगी नई पहचान
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि अब तक भगैया सिल्क को लोग भागलपुर सिल्क के नाम से जानते थे, जबकि इसके वास्तविक बुनकर गोड्डा और दुमका के विभिन्न क्षेत्रों में हैं। उन्होंने कहा कि जीआई टैग मिलने के बाद अब बुनकरों और महिला उद्यमियों को उनकी मेहनत की सही पहचान और सम्मान मिलेगा। सरकार को उम्मीद है कि यह पहल भगैया सिल्क को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के साथ-साथ बुनकर परिवारों की आय बढ़ाने और झारखंड की पारंपरिक हस्तशिल्प विरासत को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।