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महाशिवरात्रि 2018:सदाशिव के अष्ट शिवलिंग की साधना होती है विशेष फलदायी

भगवान सदाशिव के डमरू निनाद से उत्पन्न मंत्रों की साधना शिवकल्प में प्रारम्भ की जाए तो अष्ट सिद्धियां प्राप्त करने में किसी प्रकार का अवरोध नहीं उत्पन्न होता। आज पूरे देश में धूमधाम से महाशिवरात्रि का व्रत किया जा रहा है। कई जगह 14 फरवरी को भी यह व्रत किया जाएगा।  महाशिवरात्रि के पूर्व माघी पूर्णिमा से फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तक का काल खंड शिव-कल्प कहा जाता है। भगवान सदाशिव के अष्ट शिवलिंग- गौरीश्वर, इन्द्रेश्वर, भूतेश्वर, सिद्धेश्वर, बृहस्पतेश्वर, पिंगलेश्वर, महाकालेश्वर और पुष्पदंतेश्वर की साधना विशेष फलदायी मानी गयी है। इन अष्ट शिव लिंगों की अलग-अलग मंत्रशक्ति को जाग्रत करने के लिए सर्वप्रथम शिवलिंग का षोडशोपचार से पूजन कर मंत्र जाप करना चाहिए। फिर उन्हीं मंत्रों के अंत में स्वाहा जोड़ कर अग्नि में 108 आहुतियां अर्पित करने का नियम है। यह साधना शिव कल्प के अतिरिक्त किसी भी प्रदोष से भी शुरू की जा सकती है, लेकिन महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। 

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