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पटना पुलिस का \"ऑपरेशन 12 घंटा\",पड़ोसी ही निकला साजिशकर्ता,पढिये अपहरण की पूरी कहानी....

 

मरगूब आलम 

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पटना के पाटलिपुत्र इलाके से अगवा जेयाद की बरामदगी में अगर पटना पुलिस देर करती तो कुछ भी अनहोनी हो सकती थी। क्योंकि इस घटना में कोई पेशेवर अपराधी नही बल्कि वैसे नौसिखिया थे जिनका मकसद सिर्फ पैसा हासिल करना था।क्राइम सीरियल देखकर किडनैपिंग करने वाले ये वैसे किडनैपर थे जो पटना में इवेंट मैनेजर का काम करते थे। यही नही इस इन युवकों की पुलिस वालों से भी खासी  जान पहचान थी और इन्हें लगता था पुलिस इन्हें कभी नही पकड़ पाएगी।लेकिन एसएसपी मनु महाराज और एएसपी राकेश दुबे ने इनकी बनी बनाई स्क्रिप्ट को ऐसा ट्विस्ट किया कि ये पहुंच गए सलाखों के पीछे। मनु महाराज और राकेश दुबे ने अपने अनुभव का बेहतर इस्तेमाल करते हुए महज 12 घंटे के अंदर इस पूरी घटना का खुलासा कर दिया।

इस पूरी घटना का मास्टर माइंड था, अगवा छात्र जेयाद के पड़ोस में रहने वाला एक शख्स वकार। वकार प्रॉपर्टी डीलर  है।पटना में कई लोगो से उसके संबंध है।कुछ दिन पहले ही जेयाद के पिता मो आरिफ ने एक प्रोपर्टी वकार के माध्यम से ही बेची थी।वकार को पता था कि मो आरिफ के पास बड़ी रकम है। उसके साजिश रची। अपनी साजिश में पटना में इवेंट मैनेजमेंट का काम करने वाले शशि और सन्नी को भी शामिल किया। मंगलवार की सुबह जेयाद रोज की तरह स्कूल जाने के लिए घर से बस स्टॉप के लिए निकला तो रास्ते मे ही उसे पिस्टल दिखाकर पहले बाइक पर बैठाया फिर आगे चलकर एक कार में बैठाया और लेकर चले गए। तब तक घरवालों को कुछ पता नही था। 11 बजे के करीब जेयाद के पिता आरिफ को एक कॉल आया जिसमे बेटे की सलामती के लिए डेढ़ करोड़ की डिमांड की गई। इस फोन से घरवालों की हालत खराब हो गई। इस बीच पूरी घटना का मास्टर माइंड वकार भी वहां आ गया।लेकिन तब तक आरिफ ने ये बात अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ ही पुलिस को भी बता  दी थी। फोन कॉल के आधार पर पुलिस की जांच आगे शुरू हुई। जिस नंबर से कॉल किया गया था, वह जमुई के एक शख्स का था।  लेकिन जब उस शख्स के पास पुलिस पहुंची तो पता चला उसने यह सिम लिया ही नही था।नंबर एयरटेल का था जब कंपनी से जानकारी ली गई तो पता चला कि इस नंबर को हरिहर चैम्बर के पास इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस की टीम हरिहर चैम्बर पहुंची सर्विलांस की मदद से इस्तेमाल कर रहे सन्नी नामक युवक को पकड़ा गया। उसके बाद सन्नी से पूछताछ शुरू हुई। पुलिसिया पूछताछ में सन्नी टूट गया।  उसने इस घटना में शामिल होने की बात कबूली ।लेकिन उसे यह नही पता था कि अगवा जेयाद को रखा कहा गया है।इस बीच पुलिस को अविनाश और लोकेश के बारे में भी जानकारी मिली दोनो को पकड़ा गया। इस पूरी कार्रवाई में शशि, जो सन्नी की कंपनी में ही पार्टनर है, उसका पता नही चल रहा था। इस बीच पुलिस की टीम ने शशि के घर का पता लगाया जो गर्दनीबाग में था। घेराबंदी कर जब पुलिस शशि के घर गई तो एक कमरे में शशि मिल गया। जबकि एक बंद कमरे के अंदर जेयाद को रखा गया था।जेयाद के मुंह  पर कपडा  बंधा था जबकि हाथ पैर जंजीर से जकड़ा था।  

पुलिस को देखते ही जेयाद रोने लगा।पहले तो उसे यकीन ही नही हुआ कि वह बच गया। इस दौरान सबसे खास बात रही कि जेयाद के घर पर वकार लगातार मौजूद रहा, जो इस पूरी घटना का मास्टर माइंड था। जेयाद के घर पर डीएसपी कोतवाली भी थे।  जैसे ही वकार की असलियत सामने आई उसे गिरफ्त में ले लिया गया। शशि और सन्नी के ठिकानों से पुलिस के निशान वाले नंबर प्लेट के साथ कई फर्जी आईडी भी मिले है। उन दोनों गाड़ियों को भी बरामद किया गया है, जिसका इस्तेमाल अपहरण में किया गया था। वकार का कई पुलिस अधिकारियों के घर भी आना जाना था। यही वजह था कि सन्नी और शशि उनकी बातों में आ गए गए थे। गिरफ्तार अपहर्ताओं से पूछताछ के बाद यह सामने आई  कि अगर इन्हें पैसे मिल जाते या  पुलिस की कार्रवाई में देर होती तो ये जेयाद के साथ कुछ गलत कर बैठते। इसे पटना पुलिस की बड़ी सफलता और टीम वर्क का परिणाम कहे कि एक बड़ी घटना और सरकार को बड़ी फजीहत से बचा लिया।इस पूरी कार्रवाई की मोनिटरिंग खुद आईजी नैयर हसनैन खान कर रहे थे।  एसएसपी मनु महाराज के नेतृत्व में एएसपी राकेश दुबे ,सिटी एसपी सेंट्रल डी अमरकेश ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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