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 यशवंत सिन्हा अपने पहले के रुख पर कायम हैं। गुरुवार को उन्होंने फिर मोदी सरकार की उसके फैसलों को लेकर आलोचना की।  
Last Updated
28/09/2017  04:33:51:PM  IST
 
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यशवंत सिन्हा अपने पहले के रुख पर कायम हैं। गुरुवार को उन्होंने फिर मोदी सरकार की उसके फैसलों को ल
 
 
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नई दिल्ली- देश के पूर्व फाइनेंस मिनिस्टर यशवंत सिन्हा अपने पहले के रुख पर कायम हैं। गुरुवार को उन्होंने एक बार फिर मोदी सरकार की उसके फैसलों को लेकर आलोचना की। बीजेपी के सीनियर लीडर ने कहा, "सरकार नोटबंदी का नतीजा जाने बिना जीएसटी ले आई।" सिन्हा ने डिजिटल इंडिया कैम्पेन पर भी सवाल उठाया। कहा, "एक झटके में पूरा भारत कैशलेस नहीं हो सकता।" 7 प्वाइंट में पढ़ें सिन्हा ने क्या कहा...

1) नोटबंदी
- यशवंत सिन्हा ने मीडिया से बातचीत में कहा, "नोटबंदी से कोई झगड़ा नहीं है। किस वक्त करना चाहिए था, ये पता होना चाहिए। तेज बुखार को कम करके ही इलाज हो सकता है।"

2) जीएसटी
- "नोटबंदी का नतीजा जाने बिना जीएसटी ले आए। इसे लागू करने का वक्त सही नहीं था। सरकार खुद कह रही है कि एक झटका लगेगा। मतलब सरकार झटका देती रहेगी।"
- "मैं जीएसटी के सपोर्ट में था। सरकार इस पर जुलाई से अमल को लेकर जल्दबाजी में थी। अब जीएसटी फेल हो गया।"

3) इकोनॉमी
- "बहुत दिनों से हम जानते हैं कि भारत की इकोनॉमी में गिरावट आ रही थी। इसकी रफ्तार पहले ही सुस्त थी, नोटबंदी ने आग में घी का काम किया।"
- "लगातार 6 महीने से विकास दर घट रही है। योजनाओं पर तेज रफ्तार पर काम नहीं हो रहा। आज इकोनॉमी में कुछ गंभीर समस्याएं हैं, उन्हें चुटकी बजाकर दूर नहीं किया जा सकता। सुधार के लिए एनपीए को नीचे लाना चाहिए। बैंकों को इसकी मंजूरी देनी चाहिए।"

4) रोजगार
- सिन्हा ने कहा, "आज देश की जनता चाहती है कि रोजगार मिले, पर जिससे पूछो वो कहता है कि रोजगार है ही नहीं। नौकरी नहीं है तो सरकार उन्हें कहां से देगी। आज लोगों में इम्प्लॉइमेंट को लेकर चिंता है।"

5) अरुण जेटली पर
- "जेटली को कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई। वित्त मंत्रालय अपने आप में बड़ा विभाग होता है। मेरा मकसद छींटाकशी करना नहीं था।"
- "इकोनॉमी में गिरावट से सभी चिंतित हैं। जब सरकार ने एक्शन नहीं लिया तो मैंने सोचा कि इस मुद्दे को पब्लिक के बीच ले जाना चाहिए।"

6) मोदी सरकार
- "इस सरकार काे 40 महीने हो चुके हैं, इसने इकोनॉमी की रफ्तार धीमी कर दी है। हम पिछली सरकार को दोष नहीं दे सकते, क्योंकि हमें पूरा मौका मिला है।"
- "2014 से पहले की सरकार को हमने पॉलिसी पैरालिसिस में फंसा बताया था। लेकिन यह सरकार पैरालाइज्ड नहीं है, क्योंकि इसने कई फैसले लिए हैं। वेलफेयर स्कीम्स के जरिए डेवलपमेंट को लेकर सरकार कन्फ्यूज्ड है। हम जब पहली बार सत्ता में आए थे, तब दिक्कतों को 4 साल में दूर किया था।"

7) बेटे जयंत के बयान पर
- बेटे जयंत के लॉन्ग टर्म सुधार की बात पर यशवंत ने कहा, "लॉन्ग टर्म सुधार के पहले ये भी ध्यान रखना होगा कि शॉर्ट टर्म में भी तकलीफ न हो। लॉन्ग टर्म में फायदे की दलील बेकार है। 8 लाख करोड़ रुपया बैंकों में फंसा हुआ है।"
- बता दें कि जयंत ने गुरुवार को एक आर्टिकल में लिखा है कि जीएसटी, नोटबंदी और डिजिटल पेमेंट जैसी पॉलिसीज इकोनॉमी के लिए गेम चेंजर साबित हुई हैं। लॉन्ग टर्म में इनसे फायदा होगा। बीते एक या दो क्वार्टर में जो जीडीपी ग्रोथ दिखाई गई है, वो आने वाले दिनों में पड़ने वाले असर को ठीक से नहीं दिखाती।

पहले कहा था- नोटबंदी सबसे बड़ा इकोनॉमिक डिजास्टर
- सिन्हा ने बुधवार को एक अखबार में पब्लिश अपने आर्टिकल में कहा था, "इकोनॉमी की हालत खराब है। पिछले दो दशक में प्राइवेट क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट सबसे कम रहा है। जीएसटी को गलत तरीके से लागू किया गया, इससे लाखों लोग बेरोजगार हो गए। बाजार में नौकरियों के नए मौके नहीं हैं। इकोनॉमी में तो पहले से ही गिरावट आ रही थी, नोटबंदी ने तो सिर्फ आग में घी का काम किया। नोटबंदी सबसे बड़ा इकोनॉमिक डिजास्टर साबित हुई।"
- "प्राइवेट सेक्टर में इन्वेस्टमेंट लगातार कम हो रहा है। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन करीब-करीब खत्म हो चुका है। एग्रीकल्चर-कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री की हालत भी ठीक नहीं कही जा सकती। सर्विस सेक्टर में ग्रोथ रेट धीमी है। एक्सपोर्ट कम होने का असर इकोनॉमी पर साफ देखा जा सकता है।"
- "बीती दो तिमाही में ग्रोथ रेट गिर गई है। मौजूदा वक्त में ग्रोथ रेट 5.7 तक पहुंच गई है। ये बीते 3 साल में सबसे कम है। सरकार के स्पोक्सपर्सन का कहना है कि इकोनॉमी में गिरावट की वजह नोटबंदी नहीं है। वे सही बोल रहे हैं। गिरावट तो पहले ही आनी शुरू हो गई थी।"

पांच पांडव नए महाभारत की जंग जीतेंगे
- सिन्हा ने कहा, "इकोनॉमी में गिरावट एकदम से नहीं आ गई। इससे निपटा भी जा सकता है, लेकिन इसके लिए हमें मुद्दे की समझ होनी चाहिए और दिमाग में गेम प्लान तैयार करना होगा। ये सब इसलिए भी हो रहा है कि एक शख्स जरूरत से ज्यादा जिम्मेदारियों का बोझ उठाए हुए है। नतीजा हम सबके सामने है। जेटली जैसे सुपरमैन ताकत वाले भी फाइनेंस मिनिस्ट्री के साथ इंसाफ नहीं कर सकते।"
- "प्रधानमंत्री को चिंता है। वे फाइनेंस मिनिस्टर और उनके अफसरों के साथ मीटिंग कर चुके हैं। जेटली ने उन्हें ग्रोथ रेट बढ़ाने के लिए पैकेज देने का वादा किया है। हालांकि, ये अब तक सामने नहीं आया है। नई बात सिर्फ ये है कि प्रधानमंत्री की इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल का दोबारा से गठन किया गया है। यानी 5 पांडव हमारे लिए नए महाभारत की जंग जीतेंगे।"
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