news-details

फिल्म समीक्षा :पैड-मैन

रामनरेश चौरसिया

_________________________

अक्षय कुमार ने पैड-मैन बना कर दर्शकों को नये विषय पर मंथन करने का अवसर तो दिया ही है, साथ-साथ उन्होंने मनोज कुमार और गुलजार के सिनेमा-युग की यादें भी ताजा कर दी. आज के दौर में जिस तरह की फिल्में बन रही हैं, उस दौर में पैड-मैन जैसे गंभीर सामाजिक विषय पर फिल्म बनाने का साहस जल्दी कोई फिल्मकार नहीं उठा पाता है. अक्षय ने तो दो कदम आगे बढ़ कर पैड-मैन को पद्मावत के साथ ही पूरे देश में रिलीज करने की घोषणा की थी, किंतु संजय लीला भंसाली के साथ मामला सुलझ जाने के बाद वे बैक हो गये. पद्मावत और पैड-मैन दोनों अलग-अलग टेस्ट की फिल्में हैं. पद्मावत जहां हिस्टोरिकल लव स्टोरी थी, वहीं पैड-मैन महिलाओं की गंभीर समस्या पर केंद्रित है. कभी भारत कुमार यानी मनोज कुमार ऐसे सब्जेक्ट का चयन करने के महारथी माने जाते थे. इस नाम पर वे दर्शकों को देश भक्ति की चासनी भी पिलाते थें.

दर्शकों को शहर और आलिशान-भवनों, मर्सिज्ड गाड़ियों और हाई-फाई जिन्दगी से भी अक्षय ने बाहर निकाला है. अक्षय कुमार पूरी फिल्म में साईकिल चलाते नजर आये हैं. यानी वे कॉमन मैन के रुप में अवतरित हुये हैं. वैसे यह कहानी अरुणाचल मरुगन नाथन के संघर्ष और महिलाओं के लिये सस्ता पैड बनाने के अविष्कार की घटना पर आधारित है. पैड-मैन का नायक लक्ष्मी कॉमन मैन है, जो कारखाने में काम करता है. उसकी शादी राधिका से होती है. दोनों के बीच जबरदस्त प्रेम है. मासिक धर्म के दौरान राधिका के गंदे कपड़ों के इस्तेमाल और घर-समाज से कट जाने की घटना उसे अंदर तक हिला कर रख देती है. राधिका की तरह अन्य महिलाओं को भी इस समस्या से निजात दिलाने के लिये वह कमर कस लेता है. वह सस्ता-सुलभ पैड बनाने का संकल्प लेता है. इस रास्ते में उसे अपने दोस्तों, ग्रामीणों और समाज के लोगों से प्रताड़ना झेलनी पड़ती है. उसे गांव निकाला दे दिया जाता है. यहां तक कि उसे राधिका से भी अलग कर दिया जाता है. फिर भी वह अपने संकल्प से अडिग नहीं होता. उसे मदद मिलती है सोनम की, जो पैड निर्माण के लिये उसे रास्ता ही नहीं दिखाती, बल्कि उसे मदद भी करती है. दोनों का प्रयास रंग लाता है. लक्ष्मी के अविष्कार का देश-विदेश में डंका बजता है. भारत सरकार उसे पद्म-श्री से नवाजती है. अमंरिका तक में उसे सम्मानित किया जाता है. इस यात्रा में सोनम और लक्ष्मी के बीच प्रेम भी पनपता है, परंतु राधिका के प्रेम और त्याग के सामने सोनम हथियार डाल देती है.

फिल्म में अक्षय कुमार, राधिका आप्टे और सोनम कपूर ने शानदार अभिनय किया है. सच कहें, तो यह तीनों की फिल्म है. फिल्म को यर्थाथ का टच देने के लिये निर्देशक आर बाल्मि ने स्थानीय पृष्ठभूमि को तव्वजो दिया है. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और बनारस के दृश्य दर्शकों को शकून देंगे.



निर्माताः टिव्कंल खन्ना

निर्देशकः आर बल्कि

संगीतः अमित त्रिवेदी

सितारेः अक्षय कुमार, सोनम कपूर, राधिका आफ्टे और अमिताभ बच्चन आदि

 

You can share this post!

Leave Comments

madhuranjan kumar:   This Demo Message
madhuranjan kumar:    This Is Demo Message
Chandu.lal.marandi:   


You have characters left.